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admin | July 4, 2020 | 0 Comments

डर को दूर कैसे करें I

हर किसी इन्सान को किसी न किसी चीज या बात का डर लगता है. अगर कोई बोलता है कि उसे किसी भी बात से डर नहीं लगता तो ये झूट होगा. डर/भय सबको लगता है, लेकिन कुछ लोग इससे निपटने के सही तरीके अपना लेते है, जिससे वे जीवन के अनेकों डर को पीछे छोड़ आगे बढ़ जाते है. डर एक ऐसी चीज है, जो हमें आगे बढ़ने से रोकता है. डर एक नकारात्मक सोच है, जो शैतान हमारे दिमाग में डालता है.
आजकल हमारे आसपास इतनी ज्यादा नकारात्मकता होती है कि मन चाहकर भी अच्छा नहीं सोच पाता है. बहुत कम लोग होते है, जो एक दुसरे को प्रोत्साहित करते है. आगे बढ़ने की होड़ में लोग एक दुसरे को पीछे छोड़ते जाते है. चारों तरफ गलत माहौल होने से लोग भरोसा कम करते है, नकारात्मक ज्यादा हो गए है. यही सोच हमारे अंदर घर कर जाती है, और फिर किसी भी तरह से डर के रूप में सामने आती है.
डर के रूप (Type of fear)-
1.फैल होने का डर
2.भीड़ के सामने खड़े होने का डर
3.ऊंचाई, पानी का डर
4.मौत का डर
5.किसी अपने के खोने का डर

 

डर की वजह (Reason of fear)–
  • परीक्षा के समय पढाई नहीं करने पर हमें फ़ैल होने का डर लगता है, कई बार माँ बाप की अधिक अपेक्षाओं के चलते भी फ़ैल होने का डर होता है.
  • किसी बात को कहने से पहले ही डरते है, क्यूंकि लगता है सामने वाला अस्वीकार कर देगा.
  • लोगों के सामने जाने से डर लगता है, अपमान का डर लगता है.
  • ऑफिस में सही काम न करने पर बॉस का डर.
डर का दुष्प्रभाव –
  • इन्सान डिप्रेशन में चला जाता है.
  • नकारात्मक सोच के चलते, आत्म विश्वास खो देता है.
  • कई बार आत्महत्या के बारे में भी सोचने लगता है.
  • झूठ बोलना
  • जीवन में आगे नहीं बढ़ता
  • डर के मारे अपनी सही बात भी नहीं कह पाता है.
  • डर के चलते अपने टैलेंट को दुनिया के सामने नहीं लाता
  • भीड़ का हिस्सा बन जाता है
डर/भय को कम करने के तरीके (Dar ko dur karne ke upay )–
  1. सकारात्मक (पॉजिटिव) सोच बनायें – डर तभी लगता है, जब हम अपने मन में पुरानी चलती आ रही बातों पर विश्वास कर लेते है. हमको यही लगता है कि बस यही सच है, इसके अलावा कुछ हो नहीं सकता है. हम अपने मन को नकारात्मक सोच से भर लेते है, जिसके बाद कुछ अच्छे के लिए जगह ही नहीं रहती है. अपने आप को पूरी तरह से पॉजिटिव रखें, आप अच्छा सोचेंगे तो अच्छा होगा. कहते है जैसा हम सोचते है वैसा ही होता है. हमारी सोच में इतना पॉवर होता है कि वो जैसा चाहे अट्रैक्शन के द्वारा करवा सकता है. सकरात्मता से डर जैसा शैतान दूर भागता है. इसके अलावा अपनी सोच पर काबू रखें. बैठे-बैठे कुछ भी न सोचते रहें. कई बार हमारी सोच ही हमारे लिए दुश्मन बन जाती है. सकारात्मक रहने के तरीके –
  • सकारात्मक लोगों की संगति में रहें, उनसे बातें करे, उनके अनुभव को जानें.
  • सकरात्मत्क टीवी सीरियल देखें, बुक पढ़ें. अच्छा पढने देखने से सोच भी वैसी होती है.
  • विफल होने से निराश न हों, सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें.
  1. पुरानी बातों को पीछे छोड़ आगे बढ़ें – हमारे कुछ पुराने ऐसे अनुभव रहते है, जिनके चलते हम आगे ही नहीं बढ़ पाते है, उन्हें अपनी मुट्ठी में बांधे रहते है. जो बीत गया सो बीत गया. जरुरी नहीं जिस पुरानी बात ने आपको उस समय परेशान किया वो अभी भी करे. पुराने अनुभव से सीखकर, निडरता के साथ आगे बढे. डर से हम जितना डरेंगें वो उतना ही डराएगा.
  2. डर लगने पर गहरी सांस लें – डर को दूर करने का ये सबसे रेडी तरीका है. किसी भी बात का डर हो, बैठ जाएँ. गहरी, लम्बी साँसे ले. 5 min तक ऐसा करें, आप शांति महसूस करेंगें.
  3. भविष्य के बारे में न सोचें – कई बार हमें आने वाले कल के बारे में डर लगता है. कल क्या होगा, हमारा भविष्य कैसा होगा, जॉब मिलेगी की नहीं, शादी होगी की नहीं, बच्चों का भविष्य कैसा होगा, माँ बाप मानेंगें की नहीं. यही सोच सोच कर हम अपना आज ख़राब कर लेते है. भविष्य में हमारा कोई जोर नहीं है, कल हम जीयेंगें या मरेंगें हम नहीं जानते है. ईश्वर कहते है, “हम चिंता करके अपनी ज़िन्दगी में एक दिन भी अधिक नहीं जोड़ सकते है, इतना छोटा सा काम भी अगर नहीं कर सकते तो चिंता किस बात की, कल अपनी चिंता खुद करेगा, आज के लिए आज की बात और दुःख ही काफी है.” वर्तमान में जियें, भविष्य के बारे में सोचने से हमारा आज भी ख़राब हो जाता है.
  4. आत्मविश्वासी बनें – दूसरों पर भरोसा रखना अच्छी बात है, लेकिन आज की दुनिया हमें इस बात की इजाज़त नहीं देती है. सबसे पहले ईश्वर पर भरोसा रखें. याद रहें प्रभु हमारे लिए है, वो हमारे साथ है, उस पर विश्वास करने वालों को वो कभी हताश नहीं करता है. इसके बाद अपने आप पर विश्वास रखें. आत्मविश्वासी लोग ही दुनिया में आगे बढ़ते है. दूसरों पर निर्भर न रहें, अपने दम पर काम करें और अपने सपनों को पूरा करें.
  5. डर पर जीत पायें   – जिस चीज, बात से आपको डर लगता है, उसकी लिस्ट बनायें. अधिक डर वाले काम सबसे उपर रखें, और इसे कैसे पूरा करना इसके बारे में सोचें. जैसे जैसे ये काम होते जायेंगे, आपका डर ख़त्म होते जायेगा. आप अपनी कमजोरियां, ताकतें की भी लिस्ट बनायें. आपसे बेहतर कोई नहीं जानता कि आपकी कमजोरी या ताकत क्या है. कई बार हम खुद इस दिशा में नहीं सोचते है. आप अगर अपने विषय में ये सब जानेंगें तो आप उस तरह की किसी स्थति में बेहतर तरीके से अपने आप को निकाल पायेंगें.
  6. मेडिटेशन करें – मेडिटेशन, ध्यान करना बहुत होता है. दिन में 20-30 min शांति में अकेले में बैठे. आप भगवान पर विश्वास करते है, तो ये समय ईश्वर के साथ प्राथना में गुजारें. मेडिटेशन मतलब ध्यान लगाना, अपने मन की आवाज को सुनना. थोड़ी देर के लिए दुनियावी बातों को भूलकर अपने मन के अंदर आत्मा की आवाज को सुनें. जो भी बात, डर आपको परेशान कर रहा है, उसे ईश्वर से कहें, और उनके क़दमों में डाल दें. ऐसा करने से आप एक अंदरूनी ताकत महसूस करेंगें. आपका मन शांत होगा और पोसिटिवी आएगी.
  7. डर को स्वीकार नहीं करें – डर अपने कई रूप लेकर सामने आता है. वह अपना डर बनाये रखने के लिए, आपको डराता रहेगा. डर हमारे अंदर तभी आता है, जब हम उसे आने देते है. जिस समय आपको डर लगे उस समय उस बात के बिलकुल विपरीत सोचें, या उस बात के बुरे से बुरे परिणाम सोचें. ऐसा करने से आप डर का मुकाबला आमने सामने रहकर करते है. डर की आँखों में आँखे डालकर उसे कम किया जा सकता है.
  8. लक्ष्य निर्धारित करें – जीवन में दिशा या लक्ष्य नहीं होने पर हम भटक जाते है. गलत ख्याल, शैतानी बातें, डर दिमाग में घर करने लगते है. एक मंजिल होने पर हम उस मंजिल की ओर अधिक ध्यान देते है, न कि कठिन रस्ते पर. लक्ष्य प्राप्ति के समय मिलने वाली छोटी छोटी जीत से आपको ख़ुशी मिलेगी, आत्मविश्वास बढ़ेगा, जिससे आपका डर/भय भी कम होगा.
वैसे डर हमेशा बुरा नहीं होता है, जीवन में थोडा बहुत डर होना ही चाइये. सोचो अगर हमें फ़ैल होने का डर नहीं होता तो हम पढाई कैसे करते. मम्मी पापा से डांट का डर नहीं होता तो सही रस्ते पर कैसे चलते. बीमार होने का डर नहीं होता तो अपनी हेल्थ को स्वस्थ कैसे रखते. बॉस का डर नहीं होता तो ऑफिस में काम सही समय में कैसे करते. आप अगर पॉजिटिव रहेंगें तो आपके आस पास का माहोल भी खुशनुमा रहेगा. आप अपने अंदर की पोसिटिवी दूसरों को भी बाटें.

 

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