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admin | August 31, 2020 | 0 Comments

भगवान श्री कृष्ण के मुख्य 51 नाम अर्थ सहित

1 कृष्ण : सब को अपनी ओर आकर्षित करने वाला। जो सर्व आकर्षण है, जो अपनी ओर खींचता है वो कृष्ण है।

2 गिरिधर : भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपने बांय हाथ की कनिष्का ऊँगली से उठाया था जिस कारण भगवान का नाम गिरधर, गिरधारी पड़ा। गिरी: पर्व, धर: धारण करने वाला। अर्थात गोवर्धन पर्वत को उठाने वाले।

3 मुरलीधर : मुरली को धारण करने वाले।


4 पीताम्बर धारी : पीत : पीला, अम्बर : वस्त्र। जिसने पीले वस्त्रों को धारण किया हुआ है।


5 मधुसूदन : मधु नामक दैत्य को मारने वाले। भगवान श्री कृष्ण ने एक दैत्य को मारा था जिसका नाम मधु था। इसलिए भगवान -का नाम मधुसूदन पड़ा।


6 यशोदा नंदन : माँ यशोदा ने कृष्ण को पाला था, इसलिए के पुत्र होने के कारण कृष्ण का नाम यशोदा नंदन पड़ा।


7 देवकी नंदन : माँ देवकी ने कृष्ण को जन्म दिया इसलिए भगवान देवकी-नंदन कृष्ण कहलाते हैं।


8 गोपाल : गौओं को पालने वाला।


9 गोविन्द: इन्द्रियों के स्वामी, जो गोप, गोपियों को आनंद दे।


10 आनंद कंद : आनंद की राशि देने वाला। जो सुख दुःख से ऊपर है। जो आनंद की खान है।


11 कुञ्ज बिहारी : भगवान श्री कृष्ण कुञ्ज गलियों में विहार करते थे, इसलिए इनका नाम कुञ्ज बिहारी पद गया।


12 चक्रधारी : सुदर्शन चक्र धारण करने वाले। जिस ने सुदर्शन चक्र या ज्ञान चक्र या शक्ति चक्र को धारण किया हुआ है।


13 श्याम : सांवले रंग वाला।


14 माधव : जब भगवान छोटे थे और माखन चुरा के भागते थे तब मैया यशोदा कहती थी। मा धव मा धव। जिसका अर्थ है- मत भाग, मत भाग।

इसलिए भगवान का नाम पड़ा माधव।


15 मुरारी : मुर नामक दैत्य का भगवान ने वध किया और नाम पड़ा माधव।


16 असुरारी : असुरों के शत्रु।


17 बनवारी : वनों में विहार करने वाले। भगवान ने वृन्दावन, निकुंज वन, निधिवन में विहार किया।


18 मुकुंद : जिन के पास निधियाँ है। जो कान में सफेद कनेर का पुष्प लगते हैं।


19 योगेश्वर : जो योगियों के भी ईश्वर, मालिक हैं।


20 गोपेश : जो गोपियों के इष्ट हैं।


21 हरि : जो पापों को और दुःखों का हरण करने वाले हैं।


22 मनोहर : जो मन का हरण करने वाले हैं।


23 मोहन : सम्मोहित करने वाले, सबको मोहने वाले।


24 जगदीश : जगत के मालिक।


25 पालनहार : जो सबका पालन पोषण करने वाले हैं।


26 मनमोहन – जो मन को मोहने वाले हैं।


27 रुक्मिणी वल्लभ : रुक्मणी के पति हैं।


28 केशव : जिनके केश सुंदर हैं और जिन्होंने केशी नाम के दैत्य को मारा हैं। आज भी वृन्दावन में यमुना तट पर केशी घाट हैं।


29 वासुदेव : वसुदेव के पुत्र होने के कारण, या जो इन्द्रियों के स्वामी हैं।


30 रणछोड़ : एक बार भगवान श्री कृष्ण युद्ध भूमि से भाग गए थे और उनका नाम पड़ा रणछोड़।


31 गुड़ाकेश : निंद्रा को जितने वाले। ये नाम भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को दिलवाया।


32 हृषिकेश : इन्द्रियों को जितने वाले।


33 दामोदर : एक बार माँ यशोदा ने भगवान कृष्ण के पेट को रस्सी से बाँध दिया था और भगवान का नाम पड़ा दामोदर।


34 पूर्ण परब्रह्म : जिसके अंदर कोई कमी नहीं हैं जो पूर्ण हैं और जो देवताओं के भी मालिक हैं। वो पूर्ण परब्रह्म हैं।


35 देवेश : जो देवों के भी ईश हैं।


36 नाग नथिया : कलियाँ नाग को नाथने के कारण भगवान का नाम पड़ा नाग नथिया।


37 वृष्णिपति : वृष्णि नामक कुल में उत्पन्न होने के कारण।


38 यदुपति : यादवों के मालिक।


39 यदुवंशी : यदु वंश में अवतार धारण करने के कारण।


40 द्वारकाधीश : द्वारका नगरी के मालिक।


41 नागर : जो सुंदर हैं।


42 नटवर : जो एक जादूगर (नट) की तरह हैं, एक कलाकार की तरह हैं।


43 छलिया : जो छल करने वाले हैं।


44 राधा रमण : राधा रानी के साथ रमन करने के कारण।


45 अघहारी : अघ का अर्थ होता हैं पाप। जो पापों का हरण करने वाले हैं।


46 रास रचइया : रास रचाने के कारण।

47 अच्युत : जिसे पद से कोई नहीं हटा सकता। जिसका वास अखंड है। जिस के धाम से कोई वापिस नही आता है।


48 नन्द लाला : श्री नन्द जी के पुत्र होने के कारण कृष्ण का नाम नंदलाला पड़ा।


49 हे नाथ – जो सबके स्वामी हैं।


50 नारायण : जिनका वास जल में हैं।


51 बांके बिहारी – वृन्दावन में प्रकट होने के कारण श्रीकृष्ण का एक नाम बांके-बिहारी हैं।

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