Blog

admin | July 25, 2020 | 0 Comments

60 सालों तक शिरडी में गेहूं क्यों पीसते रहे साईं बाबा

साईं बाबा अपने भक्तों की जीवनशक्ति हैं. उनका नाम लेकर ही भक्त अपने जीवन की हर उलझन सुलझा लेते हैं. कुछ लोग साईं को भगवान कहते हैं तो कुछ अवतार. वहीं कुछ भक्त साईं को फरिश्ता भी मानते हैं. आज हम साईं बाबा के अनोखे चरित्र से जुड़ी कुछ ऐसी दिव्य कथाएं और जानकारियां लाए हैं जो आपकी जिंदगी बदलने की शक्ति रखती हैं.

 

साईं बाबा के ईश्वरीय गुणों की महिमा-

साईं सभी कामों को निर्विघ्न संपन्न कराने वाले गणपति के ही स्वरूप हैं.

साईं बाबा के भीतर भगवती सरस्वती का भी अंश माना गया है.

साईं संपूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार के अधिष्ठाता देवों यानि ब्रह्मा, विष्णु और महेश का भी अभिन्न अंग हैं.

साईं ही स्वयं गुरु बनकर भवसागर से पार उतारते हैं.

साईं बाबा से जुड़ी एक कहानी है- गेहूं पीसने की कहानी. तो आइए सबसे पहले इस कहानी के बारे में जानते हैं….

 

गेहूं पीसने की कथा

एक दिन सुबह-सुबह साईं बाबा हाथ से पीसने वाली चक्की से गेहूं पीसने लगे. ये देखकर वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह गए लेकिन साईं बाबा से इसका कारण पूछने की हिम्मत किसी में भी नहीं थी. सब सोच रहे थे कि साईं बाबा के ना कोई घर है ना परिवार और इनका गुजारा भी भिक्षा से हो जाता है. फिर साईं गेहूं क्यों पीस रहे हैं. साईं की ये कौन सी लीला है. तभी भीड़ से चार नि़डर महिलाएं निकलीं और बाबा को चक्की से हटाकर खुद गेहूं पीसने लगीं. जब सारा गेहूं पिस गया तो चारों महिलाओं ने आटे के चार हिस्से किए और लेकर जाने लगीं. तभी साईं ने उन्हें रोका और कहा कि ये आटा ले जाकर गांव की मेड़ पर बिखेर आओ. फिर पूछने पर पता चला कि गांव में हैजा नाम की बीमारी का प्रकोप फैल चुका था और आटा पीसकर बिखेरना उसी जानलेवा बीमारी का उपचार था. साईं की लीला ऐसी कि उसी आटे ने गांव से हैजा का संक्रामकता खत्म कर दी और गांव के लोग सुखी हो गए.

Leave a Comment

Your email address will not be published.